दोस्तों गंगोत्री धाम से प्लान बना की यमनोत्री की यात्रा की जाएगी ।तो कुछ देर आराम करने के बाद हम यमनोत्री की यात्रा के लिए चल दिए । शाम के 4 तो गंगोत्री में ही बज गए थे । आज हमारा प्लान था की आज उतर काशी पहुच कर कल सुबह यमनोत्री की यात्रा करेगे। ये फेसला बहुत भारी पड़ा हमको । क्या हुआ जब हर्षिल पहुचे तो वहा से हमने40किलो सेब खरीद लिए 10रूपए के भाव से सभी बहुत खुश थे ,की इतने कम रूपए में सेब जो हमारे यहाँ देखने को ही मिलता है हमारे यहाँ 100का भाव था । पर ये गलती की खरीद तो लिए अब लेकर केसे जाया जाये । और यमनोत्री की भी यात्रा करनी थी । जेसे तेसे बीच में20किलो बाइक पर और 20किलो स्कूटर पर रख लिए । 6 बजते ही सूरज देवता पहाड़ो के पीछे एसे गायब हो गए । जेसे गधे के सिर से सीग। अब हम सबको पता चला की गलती हो गई है । एक तो जगल का रास्ता उपर से बारिश शुरू हो गई। और उपर से बाइक ठीक से सेबो के कारण चल भी नही पा रही थी । पहाड़ो से पानी सड़क पर आ रहा था ।जिसके कारण रास्ते के गड्डे में पानी भर गया था तो सही से अंदाजा लगाना मुश्किल हो रहा था की कहा सड़क ठीक है और कहा ख़राब। बराबर से बहती गंगा की भयंकर आवाज हमको और डरा रही थी । 7बजते बजते अधेरे ने हमबीको पूरी तरह से घेर लिया। ऐसा लग रहा था जेसे रात के 11बज रहे हो, बारिश अपनी पूरी जवानी में थी और लगातार पड़ रही थी ।वापस जा नही सकते और आगे पता नही कितनी दूर उतर काशी रह गया था पता ही नही चल पा रहा था उपर से सर्दी और ज्यादा लग रही थी । बाइक पर बीच में सेबो के कारण में बाइक की टंकी पर आ गया था जिसके कारण बाइक ठीक तरह से नही चला पा रहा था । हमारी हालत ख़राब थी और डर भी लग रहा था एक दम सुनसान रास्ता ना कोई आ रहा था ना कोई जा रहा था। मेने बाइक रोकी मेरे पीछे अतुल ने स्कुटर मेने अतुल से कहा की सेबो के कारण में बाइक नही चला पा रहा हु । तो अतुल ने कहा की क्या करे मेने सेबो में से 10किलो सेब सडक के किनारे निकाल दिए सब मेरी तरफ देख रहे थे की क्या कर रहा है ओम ये मेने कहा की जान है तो जहान है। ये सेब अब में इससे ज्यादा नही ले जा सकता हु। किसी के मुह से एक बोल नही फूटा सब एकटक मेरी तरफ देख रहे थे । क्योकि में सही कह रहा था । जल्दी से अतुल ने भी ये ही किया । अब हमारे पास सिर्फ 20किलो सेब रह गए थे । 10 किलोअतुल के पास और 10 किलो मेरे पास । मेने फिर बाइक को स्टार्ट की तो बाइक स्टार्ट नही हुई । पहली दूसरी किक और ना जाने कितनी। सच में मेरा दिल सीने के अंदर हथोड़े की तरह चल रहा था । अब तो गए गुरु हो गई यात्रा अब जान के लाले पड़ गए। कोई कुछ नही बोल रहा था सब एक दुसरे को देखे जा रहे थे । चारो तरफ घनघोर अधेरा था। यदा कदा बिजली चमक जाती थी तो एक दुसरे के चेहरे उस बिजली में दिखाई देते थे। 2मिनट के बाद भगवान को याद करने के बाद मेने किक लगायी तो सहसा यकीन नही हुआ बाइक स्टार्ट हो गई । मानो वो भी हमसे मजाक कर रही हो । ये भोलेनाथ की कृपा नही थी तो क्या था । सभी के चेहरे खिल गए । मन ही मन प्रभु को धन्येवाद किया और आगे बाइक चला दी मेने । बारिश अब भी तेज थी और कुछ मीटर से ज्यादा कुछ नही दिखाई दे रहा था । कुछ देर के बाद बारिश हलकी हुई । कुछ राहत मिली दूर कही एक लाइट दिखाई थी कल्लू को उसने कहा की ओम देख कोई गाड़ी आ रही है शायद मेने देखा कुछ सेकेण्ड के लिए ज्यादा देर के लिए देख भी नही सकता था बाइक पर लगातार आगे देखना पड़ रहा था। क्योकि सड़क ख़राब थी । हा कोई गाड़ी थी दूर कही उसकी हेड लाइट की रौशनी दिखाई दे रही थी । आशा की किरण थी कम से कम उसको रोककर ये तो पूछ सकते थे की नजदीकी बस्ती कितनी दूर है। मेरे अंदर जोश भरने लगा और मेने बाइक की रफ़्तार को तेज कर दिया । पर ये क्या कुछ दूर चलने के बाद वो रौशनी दिखाई देनी बद हो गई । मेने सोचा की हो सकता है की पहाड़ो के बीच में कोई मोड़ हो जिसके कारण रौशनी ना दिखाई दी हो हुआ भी ये ही था रौशनी फिर से दिखाई देने लगी थी। अगले मोड़ पर वो रोशनी पास आती गई । वो बाइक थी । उसको रोका दो बन्दे थे । मेने कहा की भाई कहा से आरहे हो तो वो बोले की भाई जी उतरकाशी से मेने कहा की कितनी दूर है भाई तो उसने जवाब दिया अगले मोड़ से आप को दिखाई देनी शुरू हो जाएगी भाई जी कोई 8 किलोमीटर है । अब हमारे चेहरे पर ख़ुशी साफ़ देखी जा सकती थी । मेने जोर से चीख कर भोले का जैकारा लगाया और बाइक को आगे बढा दिया। घडी की सुई रात के 11:40 होने का इशारा कर रही थी । अगले मोड़ पर उतर काशी दिखाई देने लगी उतर काशी पहुचने पर भगवान का शुक्रिया अदा किया । कुछ दूर होटल था नाम शायद मनीष होटल था । हा ये ही नाम था होटल मनीष , अतुल ने मोल भाव किया 900में एक कमरा तह हुआ और होटल में जाकर खाने का ओडर दिया और रूम मेंही लाने को कह दिया भूख जोर से लग रही थी । आज तो बस किसी तरह से जान बच गई खाना खाते खाते भी बाइक का ना स्टार्ट होना और फिर एक ही बार में स्टार्ट होने के बारे में ही सोचता रहा । खाने के बाद जल्दी ही बिस्तर पकड़ लिया और जल्दी ही हमे नीद ने आ दबोचा अगले भाग में जारी......
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Monday, 9 October 2023
Sunday, 12 October 2014
बाइक से चार धाम यात्रा उतरा खंड
दोस्तों नमस्कार मै ओमत्यागी आप को अपनी यात्रा के बारे मै बताना चाहता हु। आप ने बहुत से ब्लॉग देखे होगे। बहुत अच्छा लगा की लोग कितने कम कम पैसे मै इतनी दूर दूर घूम कर आ जाते है ।उनका जवाब नहीं है ।उनको मेरा एक सलाम मेने भी सोचा की हम भी घूमते रहते है। क्यों ना अपनी यात्रा को आमजन तक पहुचाया जाए । कुच समझ नहीं आ रहा की कहा से शुरू करू ।बहुत पहले यात्रा की हुई थी ।याद भी नही उनकेबारे में फोटो ही है ।जब तो रील वाले ही केमरे थे । फोटो तो साफ़ नहीं है। पर काम चल जायेगा इनसे भी ।तो भाइयो जेसे जेसे यात्रा की बाते याद आती जाएगी आप को बताता रहूगा ।शुरुवात करता हु ।उतराखंड चार धाम यात्रा से। उत्तराखण्ड पर एक नज़र डाल ही लेते है ।उत्तराखंड का जन्म 9 नवंबर सन 2000 को भारत के सत्ताईसवें राज्य के रूप में उत्तरांचल (अब उत्तराखंड) नाम से हुआ।इससे पहले यह उत्तर प्रदेश का ही एक भाग था। उत्तराखंड 2 मंडलो गढ़वाल और कुमाऊँ में विभक्त है. उत्तराखंड में वर्तमान में 13 जिले हैं जिनमें से 7 गढ़वाल में – देहरादून , उत्तरकाशी , पौड़ी , टेहरी (अब नई टेहरी) , चमोली , रूद्रप्रयाग, हरिद्वार और 6 कुमाऊँ में-अल्मोड़ा, नैनीताल, पिथौरागढ़, चम्पावत, बागेश्वर और उधम सिंह नगर हैं। यह उत्तर में चीन , हिमाचल प्रदेश , पूर्व में नेपाल , दक्षिण में उत्तर प्रदेश और पश्चिम में हरियाणा व हिमाचल प्रदेश से घिरा हुआ है। इसकी लंबाई पूर्व से पश्चिम की ओर 358 किमी और चौड़ाई उत्तर से दक्षिण की ओर 320 किमी है। यहां 70 विधानसभा सीट , 3 राज्य सभा सीट और 5 लोकसभा सीट हैं। इस आयताकार आक़ृति के राज्य का अस्थायी राजधानी देहरादून है जिसे गैरसैण ले जाने के लिये जनता प्रयत्नशील है।उत्तराखंड का उच्च न्यायालय नैनीताल में है। उत्तराखंड का क्षेत्रफल 53483 वर्ग कि. मी. है और यहां 85 लाख (2001 की जनगणना के अनुसार) जनसंख्या निवास करती है ।उत्तराखण्ड (पूर्व नाम उत्तराञ्चल) , उत्तर भारत में स्थित एक राज्य है जिसका निर्माण 9 नवम्बर 2000 को कई वर्षों के आन्दोलन के पश्चात भारत गणराज्य के सत्ताइसवें राज्य के रूप में किया गया था . सन 2000 2006 से तक यह उत्तराञ्चल के नाम से जाना जाता था. जनवरी 2007 में स्थानीय लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए राज्य का आधिकारिक नाम बदलकर उत्तराखण्ड कर दिया गया. राज्य की सीमाएँ उत्तर में तिब्बत और पूर्व में नेपाल से लगी हैं. पश्चिम में हिमाचल प्रदेश और दक्षिण में उत्तर प्रदेश इसकी सीमा से लगे राज्य हैं. सन 2000 में अपने गठन से पूर्व यह उत्तर प्रदेश का एक भाग था. पारम्परिक हिन्दू ग्रन्थों और प्राचीन साहित्य में इस क्षेत्र का उल्लेख उत्तराखण्ड के रूप में किया गया है. हिन्दी और संस्कृत में उत्तराखण्ड का अर्थ उत्तरी क्षेत्र या भाग होता है. राज्य में हिन्दू धर्म की पवित्रतम और भारत की सबसे बड़ी नदियों गंगा और यमुना के उद्गम स्थल क्रमशः गंगोत्री और यमुनोत्री तथा इनके तटों पर बसे वैदिक संस्कृति के कई महत्त्वपूर्ण तीर्थस्थान हैं.।देहरादून, उत्तराखण्ड की अन्तरिम राजधानी होने के साथ इस राज्य का सबसे बड़ा नगर है. गैरसैण नामक एक छोटे से कस्बे को इसकी भौगोलिक स्थिति को देखते हुए भविष्य की राजधानी के रूप में प्रस्तावित किया गया है किन्तु विवादों और संसाधनों के अभाव के चलते अभी भी देहरादून अस्थाई राजधानी बना हुआ है. राज्य का उच्च न्यायालय नैनीताल में है.।राज्य सरकार ने हाल ही में हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये कुछ पहल की हैं. साथ ही बढ़ते पर्यटन व्यापार तथा उच्च तकनीकी वाले उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए आकर्षक कर योजनायें प्रस्तुत की हैं. राज्य में कुछ विवादास्पद किन्तु वृहत बाँध परियोजनाएँ भी हैं जिनकी पूरे देश में कई बार आलोचनाएँ भी की जाती रही हैं, जिनमें विशेष है भागीरथी - भीलांगना नदियों पर बनने वाली टिहरी बाँध परियोजना. इस परियोजना की कल्पना 1953 मे की गई थी और यह अन्ततः 2007 में बनकर तैयार हुआ. उत्तराखण्ड, चिपको आन्दोलन के जन्मस्थान के नाम से भी जाना जाता है. ये हुई बात उत्तराख ड की अब बात करते है यात्रा की मेरा यात्रा का कोई प्लान नही था। जॉब करता था।मै मारुती मै जो अब भी करता हु ।
मेरी जॉब के पास एक वेंकट होल था। उसके मालिक थे mr अतुल सहानी ।मै अक्सर उसके पास जा कर बेठ जाया करता था ।तो उन्होंने कहा की भाई बाइक से घुमने चलना है। तो मेने कहा की ठीक है ।घर से इजाजत नहीं मिली पर अतुल जी से वादा कर लिया था ।तो बाइक ली उन्होंने अपना स्कूटर लिया। उनका एक काम करने वाला भी साथ हो गया ।एक मेरा दोस्त है मेने उसको भी ले लिया अपने साथ । और निकल लिए हम।वो बात है न की जब बड़ो का आशीर्वाद नही होता तो कुछ भी सही नही होता है ।हुआ भी ऐसा ही जो मेरा दोस्त है जिसको मै साथ ले गया था उसको मै प्यार से कल्लु कहता हु उसने चलते हु बाइक चलाने कीजिद की ।तो मेने उसको दे दी थोरी दूर चलते ही उसने एक बाइक वाले की बाइक मै टक्कर दे मारी ।मेने शोचा लो भाई हो गई यात्रा ।बाइक वाले भाई को कोई चोट नही लगी थी ।पर उनकी लाइट टूट गई। फेसला करा पैसे दिए ।अगर यात्रा पर नही जा रहा होता तो गलती उसकी भी थी ।और नुकशान हमारी बाइक मै भी हुआ था। हेंडिल मुड गया आगे की लाइट टूट गई थी ।और चोट अलग से लग गई ।अब सब का मूड ख़राब हो गया था ।यात्रा के पहले दिन ही अशुभ हो गया। खेर बाइक ठीक कराइ इस काम मै २बज गए। मेरठ मै ही हमने सोचा था की नरेंदर नगर तक आज पहुच जायेगे इसलिए सुबह ९ बजे निकले थे ।तो असा नही हुआ हम रात 9 बजे हरिद्वार पहुचे हम रुकने के लिए होटल देख रहे थे तो मेरे दोस्त अजय का जो मेरे साथ काम करता था उसका फ़ोन आया की कहा पहुचे मेने कहा की सब प्लान उल्टा हो गया उसको सारी बात बताई तो उसने कहा की आप मेरे जीजा जी के यहाँ रुक जाओ वो ऋषि केश मै रहते है मेने मना किया पर वो नही माना उसने अपने जीजा जी को फ़ोन दिया वो मुनिकीरेती के नाम से जो जगह है वह मिल गए मिलना हुआ खाना खाया बात हुई १२ बज गए गर्मी का टाइम था जून थी शायद कह नही सकता बहुत दिन की बात है याद कर रहा हु तो सुबह ६ बजे उनसे विदा ली और चल दिए मजिल की तरह मंजिल थी बद्रीनाथ ऋषि केस कुछ दूर तक चले तो मेरा पहला अनुभव था हिल पर बाइक से यात्रा ऐसा लग रहा था की कोई पीचे से बाइक को खीचरहा हो जगल का रास्ता सुरु हो गया था उस टाइम उतराखंड में भूकंप आया था जगल के पेड़ अपनी जगह से टूट गए थे वेसे भी उतराखंड के पहाड़ पक्के पहाड़ नही है हम चलते गए मोसम बहुत सुहाना था बाइक चलामे मै मज़ा आ रहा था यात्रा का ये दूसरा दिन था
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| ये श्री नगर से पहले की फोटो है ये सबसे पहले कल्लु फिर अतुल भाई फिर उनका दोस्त ये मेने फोटो लिया है |
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