दोस्तों नमस्कार मै ओमत्यागी आप को अपनी यात्रा के बारे मै बताना चाहता हु। आप ने बहुत से ब्लॉग देखे होगे। बहुत अच्छा लगा की लोग कितने कम कम पैसे मै इतनी दूर दूर घूम कर आ जाते है ।उनका जवाब नहीं है ।उनको मेरा एक सलाम मेने भी सोचा की हम भी घूमते रहते है। क्यों ना अपनी यात्रा को आमजन तक पहुचाया जाए । कुच समझ नहीं आ रहा की कहा से शुरू करू ।बहुत पहले यात्रा की हुई थी ।याद भी नही उनकेबारे में फोटो ही है ।जब तो रील वाले ही केमरे थे । फोटो तो साफ़ नहीं है। पर काम चल जायेगा इनसे भी ।तो भाइयो जेसे जेसे यात्रा की बाते याद आती जाएगी आप को बताता रहूगा ।शुरुवात करता हु ।उतराखंड चार धाम यात्रा से। उत्तराखण्ड पर एक नज़र डाल ही लेते है ।उत्तराखंड का जन्म 9 नवंबर सन 2000 को भारत के सत्ताईसवें राज्य के रूप में उत्तरांचल (अब उत्तराखंड) नाम से हुआ।इससे पहले यह उत्तर प्रदेश का ही एक भाग था। उत्तराखंड 2 मंडलो गढ़वाल और कुमाऊँ में विभक्त है. उत्तराखंड में वर्तमान में 13 जिले हैं जिनमें से 7 गढ़वाल में – देहरादून , उत्तरकाशी , पौड़ी , टेहरी (अब नई टेहरी) , चमोली , रूद्रप्रयाग, हरिद्वार और 6 कुमाऊँ में-अल्मोड़ा, नैनीताल, पिथौरागढ़, चम्पावत, बागेश्वर और उधम सिंह नगर हैं। यह उत्तर में चीन , हिमाचल प्रदेश , पूर्व में नेपाल , दक्षिण में उत्तर प्रदेश और पश्चिम में हरियाणा व हिमाचल प्रदेश से घिरा हुआ है। इसकी लंबाई पूर्व से पश्चिम की ओर 358 किमी और चौड़ाई उत्तर से दक्षिण की ओर 320 किमी है। यहां 70 विधानसभा सीट , 3 राज्य सभा सीट और 5 लोकसभा सीट हैं। इस आयताकार आक़ृति के राज्य का अस्थायी राजधानी देहरादून है जिसे गैरसैण ले जाने के लिये जनता प्रयत्नशील है।उत्तराखंड का उच्च न्यायालय नैनीताल में है। उत्तराखंड का क्षेत्रफल 53483 वर्ग कि. मी. है और यहां 85 लाख (2001 की जनगणना के अनुसार) जनसंख्या निवास करती है ।उत्तराखण्ड (पूर्व नाम उत्तराञ्चल) , उत्तर भारत में स्थित एक राज्य है जिसका निर्माण 9 नवम्बर 2000 को कई वर्षों के आन्दोलन के पश्चात भारत गणराज्य के सत्ताइसवें राज्य के रूप में किया गया था . सन 2000 2006 से तक यह उत्तराञ्चल के नाम से जाना जाता था. जनवरी 2007 में स्थानीय लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए राज्य का आधिकारिक नाम बदलकर उत्तराखण्ड कर दिया गया. राज्य की सीमाएँ उत्तर में तिब्बत और पूर्व में नेपाल से लगी हैं. पश्चिम में हिमाचल प्रदेश और दक्षिण में उत्तर प्रदेश इसकी सीमा से लगे राज्य हैं. सन 2000 में अपने गठन से पूर्व यह उत्तर प्रदेश का एक भाग था. पारम्परिक हिन्दू ग्रन्थों और प्राचीन साहित्य में इस क्षेत्र का उल्लेख उत्तराखण्ड के रूप में किया गया है. हिन्दी और संस्कृत में उत्तराखण्ड का अर्थ उत्तरी क्षेत्र या भाग होता है. राज्य में हिन्दू धर्म की पवित्रतम और भारत की सबसे बड़ी नदियों गंगा और यमुना के उद्गम स्थल क्रमशः गंगोत्री और यमुनोत्री तथा इनके तटों पर बसे वैदिक संस्कृति के कई महत्त्वपूर्ण तीर्थस्थान हैं.।देहरादून, उत्तराखण्ड की अन्तरिम राजधानी होने के साथ इस राज्य का सबसे बड़ा नगर है. गैरसैण नामक एक छोटे से कस्बे को इसकी भौगोलिक स्थिति को देखते हुए भविष्य की राजधानी के रूप में प्रस्तावित किया गया है किन्तु विवादों और संसाधनों के अभाव के चलते अभी भी देहरादून अस्थाई राजधानी बना हुआ है. राज्य का उच्च न्यायालय नैनीताल में है.।राज्य सरकार ने हाल ही में हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये कुछ पहल की हैं. साथ ही बढ़ते पर्यटन व्यापार तथा उच्च तकनीकी वाले उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए आकर्षक कर योजनायें प्रस्तुत की हैं. राज्य में कुछ विवादास्पद किन्तु वृहत बाँध परियोजनाएँ भी हैं जिनकी पूरे देश में कई बार आलोचनाएँ भी की जाती रही हैं, जिनमें विशेष है भागीरथी - भीलांगना नदियों पर बनने वाली टिहरी बाँध परियोजना. इस परियोजना की कल्पना 1953 मे की गई थी और यह अन्ततः 2007 में बनकर तैयार हुआ. उत्तराखण्ड, चिपको आन्दोलन के जन्मस्थान के नाम से भी जाना जाता है. ये हुई बात उत्तराख ड की अब बात करते है यात्रा की मेरा यात्रा का कोई प्लान नही था। जॉब करता था।मै मारुती मै जो अब भी करता हु ।
मेरी जॉब के पास एक वेंकट होल था। उसके मालिक थे mr अतुल सहानी ।मै अक्सर उसके पास जा कर बेठ जाया करता था ।तो उन्होंने कहा की भाई बाइक से घुमने चलना है। तो मेने कहा की ठीक है ।घर से इजाजत नहीं मिली पर अतुल जी से वादा कर लिया था ।तो बाइक ली उन्होंने अपना स्कूटर लिया। उनका एक काम करने वाला भी साथ हो गया ।एक मेरा दोस्त है मेने उसको भी ले लिया अपने साथ । और निकल लिए हम।वो बात है न की जब बड़ो का आशीर्वाद नही होता तो कुछ भी सही नही होता है ।हुआ भी ऐसा ही जो मेरा दोस्त है जिसको मै साथ ले गया था उसको मै प्यार से कल्लु कहता हु उसने चलते हु बाइक चलाने कीजिद की ।तो मेने उसको दे दी थोरी दूर चलते ही उसने एक बाइक वाले की बाइक मै टक्कर दे मारी ।मेने शोचा लो भाई हो गई यात्रा ।बाइक वाले भाई को कोई चोट नही लगी थी ।पर उनकी लाइट टूट गई। फेसला करा पैसे दिए ।अगर यात्रा पर नही जा रहा होता तो गलती उसकी भी थी ।और नुकशान हमारी बाइक मै भी हुआ था। हेंडिल मुड गया आगे की लाइट टूट गई थी ।और चोट अलग से लग गई ।अब सब का मूड ख़राब हो गया था ।यात्रा के पहले दिन ही अशुभ हो गया। खेर बाइक ठीक कराइ इस काम मै २बज गए। मेरठ मै ही हमने सोचा था की नरेंदर नगर तक आज पहुच जायेगे इसलिए सुबह ९ बजे निकले थे ।तो असा नही हुआ हम रात 9 बजे हरिद्वार पहुचे हम रुकने के लिए होटल देख रहे थे तो मेरे दोस्त अजय का जो मेरे साथ काम करता था उसका फ़ोन आया की कहा पहुचे मेने कहा की सब प्लान उल्टा हो गया उसको सारी बात बताई तो उसने कहा की आप मेरे जीजा जी के यहाँ रुक जाओ वो ऋषि केश मै रहते है मेने मना किया पर वो नही माना उसने अपने जीजा जी को फ़ोन दिया वो मुनिकीरेती के नाम से जो जगह है वह मिल गए मिलना हुआ खाना खाया बात हुई १२ बज गए गर्मी का टाइम था जून थी शायद कह नही सकता बहुत दिन की बात है याद कर रहा हु तो सुबह ६ बजे उनसे विदा ली और चल दिए मजिल की तरह मंजिल थी बद्रीनाथ ऋषि केस कुछ दूर तक चले तो मेरा पहला अनुभव था हिल पर बाइक से यात्रा ऐसा लग रहा था की कोई पीचे से बाइक को खीचरहा हो जगल का रास्ता सुरु हो गया था उस टाइम उतराखंड में भूकंप आया था जगल के पेड़ अपनी जगह से टूट गए थे वेसे भी उतराखंड के पहाड़ पक्के पहाड़ नही है हम चलते गए मोसम बहुत सुहाना था बाइक चलामे मै मज़ा आ रहा था यात्रा का ये दूसरा दिन था
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| ये श्री नगर से पहले की फोटो है ये सबसे पहले कल्लु फिर अतुल भाई फिर उनका दोस्त ये मेने फोटो लिया है |


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