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Sunday, 12 October 2014

चार धाम यात्रा

मोसम बहुत सुहाना था   हम चलते जा रहे थे साप की तरह बल खाती सड़क  थी      अतुल भाई अपने साथ  एक अलग से  एक एक्स्ट्रा  टायर लाये थे  रिम के साथ  शायद किसी दोस्त की माग कर   मै मन ही मन सोच रहा था की अगर मेरी बाइक मै पिंचर हो गया तो  क्या करेगे   रह रह कर ये चिंता सताए जा रही थी मेरे को  अगर पिंचर हो गया तो गए  उस टाइम  दिमाक  ने कहा की  जहा भी जाओ पूरी  तेयारी के साथ जाओ पर अब क्या हो सकता था  जो होना था जो करना था   हो चूका था   में मन ही मन अपने दिल को  दिलासा देता रहा  पर  अतुल भाई पर गुस्सा भी आ रहा था की मेने उनसे कहा था की हवा का एक पंप साथ ले लेना पर जल्दी मै  कुछ याद नही रहा !   खेर  जेसे होगा ठीक ही होगा  इतना सोच ही रहा था की  एक फट की आवाज आई मेने  सोचा लो भाई गया टायर    रुक  कर टायर देखा  वो सही सलामत था फिर मुंडी पीछे की तो पाया अतुल जी  का स्कूटर  रुका हुआ था  रजनी घनदा का पीप सड़क पर धूक कर  अपने दात दिखा कर खिसानी हँसी हँसते हए  बोले ओम भाई    पिंचर हो गया   उनको हँसता हुआ देख कर मुझे अंदाजा हो गया था की वो अपने आप से तो टायर बदलने से रहे  मेरे दिल पर बिजली सी गिर रही थी  गुस्सा भी आ रहा था पर अब शाम ढलने लगी थी तो मेने ही  ओज़ार लेकर लग गया टायर बदलने  शाम हो चली थी  पहाड़ो पर रात जल्दी ही हो जाती है  उजाला था पर टायर बदलते बदलते अँधेरा हो चला खेर किसी तरह यात्रा फिर सुरु हई 6 बजे हम जोशीमठ पहुच चुके थे भगवान का  शुक्रिया अदा किया और  ठीक से पहुच गए  पर हमे क्या पता था की मुसीबत की तो ये शुरुवात भर है । आगे अभी और मुसीबत हमारा इन्तजार कर रही थी । जोशीमठ पहुच कर   होटल लिया  मोसम ख़राब हो गया था हलकी हलकी बुदा बादी  शुरू हो गई  थी  ठण्ड  थी गर्म कपड़े थे हमारे पास  तो पहन लिए और कल के बारे मै  योजना बनाने लगे   कमरे मै बैठकर    की कल क्या करना है किसी से पूछा की बद्रीनाथ कितनी दूर है एक दूकान वाले ने बताया की70 km है यहाँ से    यही से एक रास्ता  ओली के लिए जाता है 13  या 15 km है ओली  जहा मेने सुना था की  बहुत बर्फ बारी  होती है वहा तो और जोशीमठ से ही रोपवे भी जाता है  ऐसा सुना सच है या झूठ पता नही  उसके बारे मै कल  सोचेगे  जाना है या नही  प्लान ये बना की कल  बद्रीनाथ  जायेगे वहा से माना  जो की 3 km है वहा जायेगे  माना इण्डिया का आखरी गाँव है  उसके बाद  से चीन की सीमा  शुरू हो जाती है  माना से वापस जोशीमठ और वहा से ओली जायेगे रात को वहा ही रुकेगे ।   पर कहते है न की जो मनुष्य सोचे अगर ऐसा हो जाये तो  उससे बड़ा कोई नही हो सकता है    पर   कल  मुसीबत हमारा बेशब्री से  हसीना की तरह इन्तजार कर रही थी न जाने कब से हमारी राह तक रही थी   मानो कह रही थी आ जाओ सनम कब से इन्तजार कर रही हु आप का   रात के 11 बजे अतुल भाई सो गए       अगली सुबह  4 बजे चलने के लिए।       ........    अगले भाग में जारी