Tuesday, 14 October 2014

चार धाम यात्रा " माना"

बद्रीनाथ  के दर्शन   करने के बाद   हम लोग  माना   गाँव जाना था ।मेने कितने शिलापट देखे थे  जिन पर माना गाँव  की दुरी अंकित होती थी ।  मुझे पता था की  वो   भारत का आखरी  गाँव था ।  दिन  2:30  बज चुके थे  वापस भी जाना था। आज का प्रोग्राम ओली रुकने का था। पर मुझे आभास हो चला था की किसी भी हालत में आज   जोशीमठ ही  नही  पहुच पायेगे।  माना गाँव के बीच में एक पहाड़ी नाला था ।  धारा तेज थी सडक भी टूटी हुई थी कहा सड़क है । ये पता  ही नही चल पा रहा था।  बड़ी मुश्किल से  उस बहाव को पार किया ।  तभी वहा पर एक फोजी भाई  दिखाई दिया ।  अतुल साहनी ने  फ़ौरन  फोजी भाई को देख कर  कहा  "भारत माता की जय"  फोजी भाई ने तुरंत अभिवादन का जवाब  दिया  ।  फोजी भाई का नाम   मंजीत सिंह था वो सरदार   था। मुछे    और दाड़ी एक दम   बोडर के सनी देओल की तरह थी ।रोबदार  चेहरा   लम्बाई  लगभग 5.11   थी।   जिस्म एक दम फिट था।  सर्दी थी पर उनको शायद सर्दी का एहसास नही हो रहा था ।उम्र कोई मेरे हिसाब से 29 के आस पास थी उनकी । और आवाज  के क्या कहने  शरीर के  हिसाब से मेल खाती  थी ।  सरदार जी बोले  " पुत्तर   कहा जा रहे हो"   हमने कहा पाजी "माना " जाना है कितनी दूर है अभी । उन्होंने कहा की पहुच  गए आप । तो सरदार जी से कुछ इधर उधर की बात हुई। और हम माना की  तरफ चल दिए ।  "माना" पहुच गए । बाइक  साइड लगाई  ।गाँव के बाहर   कुछ  दुकाने थी ।वहा से  कोल्ड ड्रिंक की  बोतल और बिस्कुट खरीदे। पहाड़ो का  क्या नज़ारा था । शांति थी वहा  एक अजीब सा सुकून  मिल रहा  था । वहा से  हम उपर एक हनुमान मंदिर है । उसको देखने के लिए हम  उपर की तरफ  चढ़ाई करने लगे । पर  कुछ दूर चलते ही   एसे हाफ ने लगे जेसे कोई मेराथन दोड़ लगाकर आये हो । ऑक्सीजन की भारी कमी महसूस  होने लगी ।  हम चारो  की हालत ख़राब थी   फेप्ड़े  वातावरण की  सारी हवा ही खीचने पर उतारू थे । हमारे हालत को देख क़र एक  महिला   जिसकी उम्र लगभग 50 साल तो पक्का होगी   हमारे पास आई । हम सभी  बुलडोग  कुत्तो की तरह हाफ रहे थे ।  उन महिला के हाथ में  सरसों के फूल की तरह कोई फूल था ।  उन्होंने कहा की   आप को इस को अजमाना चाहिए।  इस  आप को राहत मिलेगी । उस फूल को  उन्होंने  हम चारो के कान के  उपर रख दिया ।  मेने पहले सोचा की  इस फूल से क्या होगा  पर आप  अंदाजा नही लगा सकते । मे आश्चर्याचकित रह  गया ।   वो तरीका काम क़र रहा था । अब हम पहले से ज्यादा  अच्छा फील कर रहे थे । ये कमाल का फूल है उनसे नाम पूछा तो  उन्होंने बताया की बाबु जी  कुछ बातो को छुपा ही रहने दे तो अच्छा है । उन महिला का शुक्रिया अदा किया और  हनुमान मंदिर के दर्शन किये   फिर एक घुफा के दर्शन किये जहा  कहा जाता है की व्याश जी ने   रामायण लिखी थी  उसके कुछ आगे चलते ही  एक बोर्ड पर लिखा था  "भारत की आखरी चाय की दूकान "     वहा उस दूकान से आगे एक बड़ी पहाड़ था उसके आगे चीन का बोडर था । उस दूकान पर चाय पी 25 रूपए की एक चाय थी।   फोटो लिए और  वापस चल दिए । क्योकि हमे जाना था ओली ।  जोशीमठ पहुचने में 6 बज गए ।  बाइक भी ठीक करानी थी ।  जोशीमठ पहुच कर  एक मेकेनिक को बाइक दिखाई । उसने बाइक का कारबोरेटर  को साफ़ करा तो बाइक एक दम टिपटॉप हो गई।  इतने देर में अतुल  भाई   ओली के बारे में जानकारी जुटा लाये ।उन्होंने बताया की ओम भाई  रात को ओली नही जा सकते है।  मेने कहा क्यों क्या थक गए आप। तो उन्होंने जवाब दिया की   थका नही हु । ओली का रास्ता खतरे से खाली नही है इस वक़्त ।  क्योकि इस टाइम सड़क पर भालू आ जाते है । जगल का रास्ता है  ।    भलाई इसी में है की रात जोशीमठ में ही गुजारी जाये । सुबह देखेगे । मेरा मन था पर पर जान सब को प्यारी होती है।  मन को  समझाया और ओली जाने का ख़याल मन से किसी तरह निकाल दिया ।  रात उसी होटल में गुजारी      अगले भाग में जारी

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