मोसम बहुत सुहाना था हम चलते जा रहे थे साप की तरह बल खाती सड़क थी अतुल भाई अपने साथ एक अलग से एक एक्स्ट्रा टायर लाये थे रिम के साथ शायद किसी दोस्त की माग कर मै मन ही मन सोच रहा था की अगर मेरी बाइक मै पिंचर हो गया तो क्या करेगे रह रह कर ये चिंता सताए जा रही थी मेरे को अगर पिंचर हो गया तो गए उस टाइम दिमाक ने कहा की जहा भी जाओ पूरी तेयारी के साथ जाओ पर अब क्या हो सकता था जो होना था जो करना था हो चूका था में मन ही मन अपने दिल को दिलासा देता रहा पर अतुल भाई पर गुस्सा भी आ रहा था की मेने उनसे कहा था की हवा का एक पंप साथ ले लेना पर जल्दी मै कुछ याद नही रहा ! खेर जेसे होगा ठीक ही होगा इतना सोच ही रहा था की एक फट की आवाज आई मेने सोचा लो भाई गया टायर रुक कर टायर देखा वो सही सलामत था फिर मुंडी पीछे की तो पाया अतुल जी का स्कूटर रुका हुआ था रजनी घनदा का पीप सड़क पर धूक कर अपने दात दिखा कर खिसानी हँसी हँसते हए बोले ओम भाई पिंचर हो गया उनको हँसता हुआ देख कर मुझे अंदाजा हो गया था की वो अपने आप से तो टायर बदलने से रहे मेरे दिल पर बिजली सी गिर रही थी गुस्सा भी आ रहा था पर अब शाम ढलने लगी थी तो मेने ही ओज़ार लेकर लग गया टायर बदलने शाम हो चली थी पहाड़ो पर रात जल्दी ही हो जाती है उजाला था पर टायर बदलते बदलते अँधेरा हो चला खेर किसी तरह यात्रा फिर सुरु हई 6 बजे हम जोशीमठ पहुच चुके थे भगवान का शुक्रिया अदा किया और ठीक से पहुच गए पर हमे क्या पता था की मुसीबत की तो ये शुरुवात भर है । आगे अभी और मुसीबत हमारा इन्तजार कर रही थी । जोशीमठ पहुच कर होटल लिया मोसम ख़राब हो गया था हलकी हलकी बुदा बादी शुरू हो गई थी ठण्ड थी गर्म कपड़े थे हमारे पास तो पहन लिए और कल के बारे मै योजना बनाने लगे कमरे मै बैठकर की कल क्या करना है किसी से पूछा की बद्रीनाथ कितनी दूर है एक दूकान वाले ने बताया की70 km है यहाँ से यही से एक रास्ता ओली के लिए जाता है 13 या 15 km है ओली जहा मेने सुना था की बहुत बर्फ बारी होती है वहा तो और जोशीमठ से ही रोपवे भी जाता है ऐसा सुना सच है या झूठ पता नही उसके बारे मै कल सोचेगे जाना है या नही प्लान ये बना की कल बद्रीनाथ जायेगे वहा से माना जो की 3 km है वहा जायेगे माना इण्डिया का आखरी गाँव है उसके बाद से चीन की सीमा शुरू हो जाती है माना से वापस जोशीमठ और वहा से ओली जायेगे रात को वहा ही रुकेगे । पर कहते है न की जो मनुष्य सोचे अगर ऐसा हो जाये तो उससे बड़ा कोई नही हो सकता है पर कल मुसीबत हमारा बेशब्री से हसीना की तरह इन्तजार कर रही थी न जाने कब से हमारी राह तक रही थी मानो कह रही थी आ जाओ सनम कब से इन्तजार कर रही हु आप का रात के 11 बजे अतुल भाई सो गए अगली सुबह 4 बजे चलने के लिए। ........ अगले भाग में जारी
Sunday, 12 October 2014
बाइक से चार धाम यात्रा उतरा खंड
दोस्तों नमस्कार मै ओमत्यागी आप को अपनी यात्रा के बारे मै बताना चाहता हु। आप ने बहुत से ब्लॉग देखे होगे। बहुत अच्छा लगा की लोग कितने कम कम पैसे मै इतनी दूर दूर घूम कर आ जाते है ।उनका जवाब नहीं है ।उनको मेरा एक सलाम मेने भी सोचा की हम भी घूमते रहते है। क्यों ना अपनी यात्रा को आमजन तक पहुचाया जाए । कुच समझ नहीं आ रहा की कहा से शुरू करू ।बहुत पहले यात्रा की हुई थी ।याद भी नही उनकेबारे में फोटो ही है ।जब तो रील वाले ही केमरे थे । फोटो तो साफ़ नहीं है। पर काम चल जायेगा इनसे भी ।तो भाइयो जेसे जेसे यात्रा की बाते याद आती जाएगी आप को बताता रहूगा ।शुरुवात करता हु ।उतराखंड चार धाम यात्रा से। उत्तराखण्ड पर एक नज़र डाल ही लेते है ।उत्तराखंड का जन्म 9 नवंबर सन 2000 को भारत के सत्ताईसवें राज्य के रूप में उत्तरांचल (अब उत्तराखंड) नाम से हुआ।इससे पहले यह उत्तर प्रदेश का ही एक भाग था। उत्तराखंड 2 मंडलो गढ़वाल और कुमाऊँ में विभक्त है. उत्तराखंड में वर्तमान में 13 जिले हैं जिनमें से 7 गढ़वाल में – देहरादून , उत्तरकाशी , पौड़ी , टेहरी (अब नई टेहरी) , चमोली , रूद्रप्रयाग, हरिद्वार और 6 कुमाऊँ में-अल्मोड़ा, नैनीताल, पिथौरागढ़, चम्पावत, बागेश्वर और उधम सिंह नगर हैं। यह उत्तर में चीन , हिमाचल प्रदेश , पूर्व में नेपाल , दक्षिण में उत्तर प्रदेश और पश्चिम में हरियाणा व हिमाचल प्रदेश से घिरा हुआ है। इसकी लंबाई पूर्व से पश्चिम की ओर 358 किमी और चौड़ाई उत्तर से दक्षिण की ओर 320 किमी है। यहां 70 विधानसभा सीट , 3 राज्य सभा सीट और 5 लोकसभा सीट हैं। इस आयताकार आक़ृति के राज्य का अस्थायी राजधानी देहरादून है जिसे गैरसैण ले जाने के लिये जनता प्रयत्नशील है।उत्तराखंड का उच्च न्यायालय नैनीताल में है। उत्तराखंड का क्षेत्रफल 53483 वर्ग कि. मी. है और यहां 85 लाख (2001 की जनगणना के अनुसार) जनसंख्या निवास करती है ।उत्तराखण्ड (पूर्व नाम उत्तराञ्चल) , उत्तर भारत में स्थित एक राज्य है जिसका निर्माण 9 नवम्बर 2000 को कई वर्षों के आन्दोलन के पश्चात भारत गणराज्य के सत्ताइसवें राज्य के रूप में किया गया था . सन 2000 2006 से तक यह उत्तराञ्चल के नाम से जाना जाता था. जनवरी 2007 में स्थानीय लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए राज्य का आधिकारिक नाम बदलकर उत्तराखण्ड कर दिया गया. राज्य की सीमाएँ उत्तर में तिब्बत और पूर्व में नेपाल से लगी हैं. पश्चिम में हिमाचल प्रदेश और दक्षिण में उत्तर प्रदेश इसकी सीमा से लगे राज्य हैं. सन 2000 में अपने गठन से पूर्व यह उत्तर प्रदेश का एक भाग था. पारम्परिक हिन्दू ग्रन्थों और प्राचीन साहित्य में इस क्षेत्र का उल्लेख उत्तराखण्ड के रूप में किया गया है. हिन्दी और संस्कृत में उत्तराखण्ड का अर्थ उत्तरी क्षेत्र या भाग होता है. राज्य में हिन्दू धर्म की पवित्रतम और भारत की सबसे बड़ी नदियों गंगा और यमुना के उद्गम स्थल क्रमशः गंगोत्री और यमुनोत्री तथा इनके तटों पर बसे वैदिक संस्कृति के कई महत्त्वपूर्ण तीर्थस्थान हैं.।देहरादून, उत्तराखण्ड की अन्तरिम राजधानी होने के साथ इस राज्य का सबसे बड़ा नगर है. गैरसैण नामक एक छोटे से कस्बे को इसकी भौगोलिक स्थिति को देखते हुए भविष्य की राजधानी के रूप में प्रस्तावित किया गया है किन्तु विवादों और संसाधनों के अभाव के चलते अभी भी देहरादून अस्थाई राजधानी बना हुआ है. राज्य का उच्च न्यायालय नैनीताल में है.।राज्य सरकार ने हाल ही में हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये कुछ पहल की हैं. साथ ही बढ़ते पर्यटन व्यापार तथा उच्च तकनीकी वाले उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए आकर्षक कर योजनायें प्रस्तुत की हैं. राज्य में कुछ विवादास्पद किन्तु वृहत बाँध परियोजनाएँ भी हैं जिनकी पूरे देश में कई बार आलोचनाएँ भी की जाती रही हैं, जिनमें विशेष है भागीरथी - भीलांगना नदियों पर बनने वाली टिहरी बाँध परियोजना. इस परियोजना की कल्पना 1953 मे की गई थी और यह अन्ततः 2007 में बनकर तैयार हुआ. उत्तराखण्ड, चिपको आन्दोलन के जन्मस्थान के नाम से भी जाना जाता है. ये हुई बात उत्तराख ड की अब बात करते है यात्रा की मेरा यात्रा का कोई प्लान नही था। जॉब करता था।मै मारुती मै जो अब भी करता हु ।
मेरी जॉब के पास एक वेंकट होल था। उसके मालिक थे mr अतुल सहानी ।मै अक्सर उसके पास जा कर बेठ जाया करता था ।तो उन्होंने कहा की भाई बाइक से घुमने चलना है। तो मेने कहा की ठीक है ।घर से इजाजत नहीं मिली पर अतुल जी से वादा कर लिया था ।तो बाइक ली उन्होंने अपना स्कूटर लिया। उनका एक काम करने वाला भी साथ हो गया ।एक मेरा दोस्त है मेने उसको भी ले लिया अपने साथ । और निकल लिए हम।वो बात है न की जब बड़ो का आशीर्वाद नही होता तो कुछ भी सही नही होता है ।हुआ भी ऐसा ही जो मेरा दोस्त है जिसको मै साथ ले गया था उसको मै प्यार से कल्लु कहता हु उसने चलते हु बाइक चलाने कीजिद की ।तो मेने उसको दे दी थोरी दूर चलते ही उसने एक बाइक वाले की बाइक मै टक्कर दे मारी ।मेने शोचा लो भाई हो गई यात्रा ।बाइक वाले भाई को कोई चोट नही लगी थी ।पर उनकी लाइट टूट गई। फेसला करा पैसे दिए ।अगर यात्रा पर नही जा रहा होता तो गलती उसकी भी थी ।और नुकशान हमारी बाइक मै भी हुआ था। हेंडिल मुड गया आगे की लाइट टूट गई थी ।और चोट अलग से लग गई ।अब सब का मूड ख़राब हो गया था ।यात्रा के पहले दिन ही अशुभ हो गया। खेर बाइक ठीक कराइ इस काम मै २बज गए। मेरठ मै ही हमने सोचा था की नरेंदर नगर तक आज पहुच जायेगे इसलिए सुबह ९ बजे निकले थे ।तो असा नही हुआ हम रात 9 बजे हरिद्वार पहुचे हम रुकने के लिए होटल देख रहे थे तो मेरे दोस्त अजय का जो मेरे साथ काम करता था उसका फ़ोन आया की कहा पहुचे मेने कहा की सब प्लान उल्टा हो गया उसको सारी बात बताई तो उसने कहा की आप मेरे जीजा जी के यहाँ रुक जाओ वो ऋषि केश मै रहते है मेने मना किया पर वो नही माना उसने अपने जीजा जी को फ़ोन दिया वो मुनिकीरेती के नाम से जो जगह है वह मिल गए मिलना हुआ खाना खाया बात हुई १२ बज गए गर्मी का टाइम था जून थी शायद कह नही सकता बहुत दिन की बात है याद कर रहा हु तो सुबह ६ बजे उनसे विदा ली और चल दिए मजिल की तरह मंजिल थी बद्रीनाथ ऋषि केस कुछ दूर तक चले तो मेरा पहला अनुभव था हिल पर बाइक से यात्रा ऐसा लग रहा था की कोई पीचे से बाइक को खीचरहा हो जगल का रास्ता सुरु हो गया था उस टाइम उतराखंड में भूकंप आया था जगल के पेड़ अपनी जगह से टूट गए थे वेसे भी उतराखंड के पहाड़ पक्के पहाड़ नही है हम चलते गए मोसम बहुत सुहाना था बाइक चलामे मै मज़ा आ रहा था यात्रा का ये दूसरा दिन था
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| ये श्री नगर से पहले की फोटो है ये सबसे पहले कल्लु फिर अतुल भाई फिर उनका दोस्त ये मेने फोटो लिया है |
Wednesday, 24 September 2014
न्यू मारुती ciaz
कंपनी इससे पहले मारुति बलेनो और मारुति एसएक्स4 को इस सेगमेंट में उतार चुकी है। इन कारों ने कुछ खास अच्छा प्रदर्शन ही किया। लेकिन मारुति सियाज इन कारों से बेहतर कर सकती है।
महज तीन दिन में मारुति सियाज ने 3,000 कारों की बुकिंग की है। ये कंपनी के लिए अच्छा संकेत हो सकता है, लेकिन मारुति की पिछली मिड साइज कार को कोशिश को देखकर ये कहना जल्दबाजी होगी कि मारुति सियाज कामयाबी की राह पर है।मिड-साइज सेगमेंट में मारुति सियाज का सीधा मुकाबला होंडा सिटी और हुंडई वेरना से है। मिड साइज सेगमेंट में होंडा सिटी की सबसे अच्छी पकड़ है।
होंडा प्रति माह करीब 7,000 होंडा सिटी की बिक्री करती है जबकि हुंडई वेरना एक महीने में करीब 3,000 बिकती हैं। सियाज की सबसे बड़ी सफलता का राज है सबसे ज्यादा माइलेज कार।
कंपनी का दावा है कि मारुति सुजुकी कार 26.3 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देगी। होंडा की सिटी एक लीटर में 26 किमी का माइलेज देने का दावा करती है। साभार अमर उजाला न्यूज़ पेपर
मारुती के न्यू कार celerio फ़ीचर्स
बस ड्राइव मोड पर गियर शिफ्ट करें और एक उत्साही ड्राइव का लुत्फ� उठा सकते हैं। मेरी चंडीगढ़ से दिल्ली की ड्राइव में मैंने इसे 160 किमी तक पहुंचाया लेकिन यह गाड़ी 100 से 110 किमी प्रति घंटा के बीच में ही सबसे अधिक आराम महसूस कराती ह
गीली सड़क पर जब टायर सड़क को उतने अच्छे से नहीं पकड़ पाते, तब एबीएस रामबाण साबित होता है। अन्य फीचर में ब्लूटूथ ऑडियो सिस्टम, स्टीयरिंग पर ऑडियो और फोन कंट्रोल, इलेक्ट्रिक रियर व्यू मिरर्स, पावर विंडो, की लेस एंट्री, टिल्ट स्टीयरिंग आदि शामिल हैं।
हालांकि ये सब भी टॉप मॉडल में ही हैं। एसी विद हीटर, पावर स्टियरिंग और मल्टी फंक्शन डिसप्ले जैसे फीचर्स बेस वैरियंट में भी दिए हैं।
ोकप्रिय के-10 इंजन के नए अवतार 1.0 लीटर के-नेक्स्ट इंजन का प्रयोग किया है। यह 68 बीएचपी की शक्ति और 90 एनएम का टॉर्क� उत्पन्न करती है जो कि एक कांपैक्ट कार के लिहाज से संतोषजनक है। इसका ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन पारंपरिक ट्रांसमिशन से अलग है।
सुरक्षा फीचरों की बात करें तो इसमें सेलेरियो में एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (एबीएस), एयरबैग्स, फ्रंट फॉग लैंप्स और रियर विंडो वाइपर को जगह दी है। लेकिन यह सब कुछ सिर्फ� टॉप वैरिएंट में मिलेंगे। जीरकपुर में हो रही भारी बारिश से गुजरते हुए मैंने इसके एबीएस को परखा।
Wednesday, 3 September 2014
Monday, 1 September 2014
रोचक जानकारी
जनरल नॉलेज : छोटी लेकिन काम की बातें
- प्राणदायक वायु ऑक्सीजन की खोज जोसेफ प्रिस्टले ने की।
- फूलों के अरेंजमेंट की जापानी आर्ट को इकेबाना कहा जाता है।
- दुनिया की सबसे बड़ी नदी नील नदी है।
- दुनिया के सबसे बड़े जलप्रपात नियाग्रा फॉल की खोज लुईस हेन्नेपिन ने की।
- नोबेल पुरस्कार की शुरुआत 1895 में की गई।
- तिब्बत को सामान्यत: दुनिया की छत कहा जाता है।
- पेरिस के एफिल टॉवर का निर्माण अलेक्जेंडर एफिल ने करवाया था।
- मशहूर मोनालिसा की तस्वीर लियोनार्डो द विंसी द्वारा बनाई गई।
- ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है।
- दुनिया का सबसे बड़ा रेगिस्तान सहारा है।
- दुनिया का सबसे बड़ा महासागर प्रशांत महासागर है।
- ऑस्ट्रेलिया की खोज जेम्स कुक ने की थी।
- 15 अगस्त को भारत के साथ-साथ दक्षिण कोरिया भी अपने स्वाधीनता पर्व को मनाता है।
- न्यूयॉर्क शहर का निक नेम बिग एप्पल है।




