Tuesday, 14 October 2014

चार धाम यात्रा " माना"

बद्रीनाथ  के दर्शन   करने के बाद   हम लोग  माना   गाँव जाना था ।मेने कितने शिलापट देखे थे  जिन पर माना गाँव  की दुरी अंकित होती थी ।  मुझे पता था की  वो   भारत का आखरी  गाँव था ।  दिन  2:30  बज चुके थे  वापस भी जाना था। आज का प्रोग्राम ओली रुकने का था। पर मुझे आभास हो चला था की किसी भी हालत में आज   जोशीमठ ही  नही  पहुच पायेगे।  माना गाँव के बीच में एक पहाड़ी नाला था ।  धारा तेज थी सडक भी टूटी हुई थी कहा सड़क है । ये पता  ही नही चल पा रहा था।  बड़ी मुश्किल से  उस बहाव को पार किया ।  तभी वहा पर एक फोजी भाई  दिखाई दिया ।  अतुल साहनी ने  फ़ौरन  फोजी भाई को देख कर  कहा  "भारत माता की जय"  फोजी भाई ने तुरंत अभिवादन का जवाब  दिया  ।  फोजी भाई का नाम   मंजीत सिंह था वो सरदार   था। मुछे    और दाड़ी एक दम   बोडर के सनी देओल की तरह थी ।रोबदार  चेहरा   लम्बाई  लगभग 5.11   थी।   जिस्म एक दम फिट था।  सर्दी थी पर उनको शायद सर्दी का एहसास नही हो रहा था ।उम्र कोई मेरे हिसाब से 29 के आस पास थी उनकी । और आवाज  के क्या कहने  शरीर के  हिसाब से मेल खाती  थी ।  सरदार जी बोले  " पुत्तर   कहा जा रहे हो"   हमने कहा पाजी "माना " जाना है कितनी दूर है अभी । उन्होंने कहा की पहुच  गए आप । तो सरदार जी से कुछ इधर उधर की बात हुई। और हम माना की  तरफ चल दिए ।  "माना" पहुच गए । बाइक  साइड लगाई  ।गाँव के बाहर   कुछ  दुकाने थी ।वहा से  कोल्ड ड्रिंक की  बोतल और बिस्कुट खरीदे। पहाड़ो का  क्या नज़ारा था । शांति थी वहा  एक अजीब सा सुकून  मिल रहा  था । वहा से  हम उपर एक हनुमान मंदिर है । उसको देखने के लिए हम  उपर की तरफ  चढ़ाई करने लगे । पर  कुछ दूर चलते ही   एसे हाफ ने लगे जेसे कोई मेराथन दोड़ लगाकर आये हो । ऑक्सीजन की भारी कमी महसूस  होने लगी ।  हम चारो  की हालत ख़राब थी   फेप्ड़े  वातावरण की  सारी हवा ही खीचने पर उतारू थे । हमारे हालत को देख क़र एक  महिला   जिसकी उम्र लगभग 50 साल तो पक्का होगी   हमारे पास आई । हम सभी  बुलडोग  कुत्तो की तरह हाफ रहे थे ।  उन महिला के हाथ में  सरसों के फूल की तरह कोई फूल था ।  उन्होंने कहा की   आप को इस को अजमाना चाहिए।  इस  आप को राहत मिलेगी । उस फूल को  उन्होंने  हम चारो के कान के  उपर रख दिया ।  मेने पहले सोचा की  इस फूल से क्या होगा  पर आप  अंदाजा नही लगा सकते । मे आश्चर्याचकित रह  गया ।   वो तरीका काम क़र रहा था । अब हम पहले से ज्यादा  अच्छा फील कर रहे थे । ये कमाल का फूल है उनसे नाम पूछा तो  उन्होंने बताया की बाबु जी  कुछ बातो को छुपा ही रहने दे तो अच्छा है । उन महिला का शुक्रिया अदा किया और  हनुमान मंदिर के दर्शन किये   फिर एक घुफा के दर्शन किये जहा  कहा जाता है की व्याश जी ने   रामायण लिखी थी  उसके कुछ आगे चलते ही  एक बोर्ड पर लिखा था  "भारत की आखरी चाय की दूकान "     वहा उस दूकान से आगे एक बड़ी पहाड़ था उसके आगे चीन का बोडर था । उस दूकान पर चाय पी 25 रूपए की एक चाय थी।   फोटो लिए और  वापस चल दिए । क्योकि हमे जाना था ओली ।  जोशीमठ पहुचने में 6 बज गए ।  बाइक भी ठीक करानी थी ।  जोशीमठ पहुच कर  एक मेकेनिक को बाइक दिखाई । उसने बाइक का कारबोरेटर  को साफ़ करा तो बाइक एक दम टिपटॉप हो गई।  इतने देर में अतुल  भाई   ओली के बारे में जानकारी जुटा लाये ।उन्होंने बताया की ओम भाई  रात को ओली नही जा सकते है।  मेने कहा क्यों क्या थक गए आप। तो उन्होंने जवाब दिया की   थका नही हु । ओली का रास्ता खतरे से खाली नही है इस वक़्त ।  क्योकि इस टाइम सड़क पर भालू आ जाते है । जगल का रास्ता है  ।    भलाई इसी में है की रात जोशीमठ में ही गुजारी जाये । सुबह देखेगे । मेरा मन था पर पर जान सब को प्यारी होती है।  मन को  समझाया और ओली जाने का ख़याल मन से किसी तरह निकाल दिया ।  रात उसी होटल में गुजारी      अगले भाग में जारी

Monday, 13 October 2014

चार धाम यात्रा

आज  तीसरा दिन था    सुबह  4 बजे  सबको  उठाया   में  अपने आप को ही आलसी समझता था  मेरे मित्र मेरे से भी ज्यादा आलसी  थे  सबको उठाया   दिनचर्या  से फरिक होकर 5 बजे हम बिना कुछ खाए पिये चल दिए मंजिल थी बद्रीनाथ   में यहाँ आप को बता दू की जोशीमठ से रास्ता  वनवे  है  यहाँ से 200  बाइक या कार को एक साथ  यहाँ की पुलिस जाने देते है  जब ये बाइक बद्रीनाथ पहुच जाती है   तब वहा से ऐसे ही 200 व्हीकल को उधर से आने देते है ।   वहा एक बेरियर लगाया हुआ था ये 2005 की बात है शायद अब 2 लाइन हो गई होगी पता नही मेरे को  पर जब ऐसे ही होता था ।     बेरियर के पास पहुचने पर पुलिस वालो ने रोका  पर हम ने सोचा की पैसे मागने होगे मेने बाइक  को रोका नही  ये  बाद में पता चला की  वो क्यों रोक रहे थे ।   कोहरा  पड़ रहा था ना होता तो अवश्य ही पकड़ लेते वो   हम ख़ुशी के मारे  फुले नही
समां रहे  थे की केसे चकमा दे दिया   आगे चले तो कल रात की बारिश की वजह से कितने पहाड़  अपनी जगह से   सड़क पर गिर गए थे  इस कारण ही वो हमें रोक रहे थे ।   पहाड़ का मलवा  सड़क पर यहाँ वहा बिकरा पड़ा था  और पहाड़ गिर भी रहे थे  एक बार दिल में आया की वापस चले  पर मेने ये बात किसी से नही कही पर  शर्त लगा सकता हु की मेरे से ज्यादा  उनकी हालत ख़राब हो रही थी पर कोई भी अपनी जबान से कहने को तेयार नही था की कही डरपोक ना समझ ले कोई  एक तो कोहरा इतना ज्यादा ऊपर से  कीचड़  में बाइक  ऐसे चल रही थी जेसे कोई  मतवाला दारू पी कर चला रहा हो  जेसे उसकी बाइक में  तेल की जगह दारू  हो । बहुत सभाल कर बाइक चलाना पड़ रहा था ।   हमारे पीछे पहाड़  गिर रहे थे दिखाई तो नही दे रहे थे पर आवाज आ रही थी और पीछे बेठा दोस्त बार बार कह रहा था की ये गिरा वो गिरा मुझे भी पता था की वो सच बोल रहा है । पर में अपना डर  उस पर जाहिर नही करना  चाहता था  मेने बाइक रोकी और उससे कहा की अगर मेरे साथ चलना है तो अपने  इस  मुह को बंद रखो वर्ना अतुल भाई के साथ बेठ जाओ वो  चुप चाप मेरी तरफ देखता रहा बोला कुछ नही पर   अवश्य ही मन ही मन गाली जरुर दे रहा होगा ।   पहाड़ से उतारते ही  हालत  कुछ ठीक हुए ।   7 बज गए थे   सूरज  निकलने लगा था ।  अब हमको पता चला की  हम कहा है  एक  रास्ता था रास्ता क्या  सड़क का तो पता नही कितने नीचे थी  पहाड़ का मलवा था उसी पर हम चले जा रहे थे ।     साइड में एक तरह पहाड़ और दूसरी तरफ अलकनंदा नदी कल कल की   आवाज के साथ  हमारे साथ चल रही थी    काफी नीचे  से आवाज आ रही थी बड़ी डरावनी आवाज     अलकनन्दा के बारे में बाते चल ही रही है तो एक नज़र डाल ही लेते है

अलकनन्दा नदी गंगा की सहयोगी नदी हैं। यह गंगा के चार नामों में से एक है। चार धामों में गंगा के कई रूप और नाम हैं। गंगोत्री में गंगा को भागीरथी के नाम से जाना जाता है, केदारनाथ में मंदाकिनी और बद्रीनाथ में अलकनन्दा। यह उत्तराखंड में शतपथ और भगीरथ खड़क नामक हिमनदों से निकलती है। यह स्थान गंगोत्री कहलाता है। अलकनंदा नदी घाटी में लगभग २२९ किमी तक बहती है। देव प्रयाग या विष्णु प्रयाग में अलकनंदा और भागीरथी का संगम होता है और इसके बाद अलकनंदा नाम समाप्त होकर केवल गंगा नाम रह जाता है। अलकनंदा चमोली टेहरी और पौड़ी जिलों से होकर गुज़रती है।. गंगा के पानी में इसका योगदान भागीरथी से अधिक है। हिंदुओं का प्रसिद्ध तीर्थस्थल बद्रीनाथ अलखनंदा के तट पर ही बसा हुआ है। राफ्टिंग इत्यादि साहसिक नौका खेलों के लिए यह नदी बहुत लोकप्रिय है। तिब्बत की सीमा के पास केशवप्रयाग स्थान पर यह आधुनिक सरस्वती नदी से मिलती है। केशवप्रयाग बद्रीनाथ से कुछ ऊँचाई पर स्थित है।
गहराई

अलकनन्दा नदी कहीं बहुत गहरी, तो कहीं उथली है, नदी की औसत गहराई 5 फुट (1.3 मीटर), और अधिकतम गहराई 14 फीट (4.4 मीटर) है. ।   ये बात हुए नदी की  अब  बात करते है  यात्रा की   हम चले जा रहे थे   वाहन  ना हमारे पीछे था ।और ना ही आगे से आ रहा था शायद आगे रास्ता बंद था मेरे  अनुमान से   एक बात और हुई की अचानक बाइक बंद हो गई बहुत किक मारी  पर बाइक ने कहा की स्टार्ट नही   कर पाओगे त्यागी जी  ।    अपनी मेकेनिक वाला दिमाक को लगाया और  सोचा क्या हुआ होगा । सर्विस करा कर लाया था फिर आखिर क्या हुआ ऐसा  दिमाक पर और जोर दिया तो पता चला की मेरा दोस्त   जो शर्मा है । जो मेरे साथ था कल्लू वो शर्मा है   जी की ऑटोमोबाइल की दुकान है ।उसने ही बाइक की सर्विस कराई थी । शायद स्पाक प्लग पुराना ही डलवा दिया हो । मेने पूछा तो उसने गुस्से में मेरी तरफ देख कर कहा की नया प्लग ही दिया था दूकान से    खोल कर चेक करो।  अभी मेने कहा भाई शर्मा जी बस पूछ रहा था ।  फिर ख्याल आया की शर्मा जी ने 2 लीटर तेल अपनी दूकान से डाला था बाइक में फ्यूल  वो  डिब्बा जिस में फ्यूल रखा था वो कार के कूलैंट का था शायद फ्यूल के साथ कूलैंट भी टंकी में गिर गया था । मेने प्लग को खोला और साफ़ कर के दुबारा लगाया तो  महारानी तुरंत स्टार्ट हो गई  जान में जान आई । अब सफ़र दोबारा से शुरू किया   पहाड़  का नज़ारा दिल को   बहुत अच्छा फील करा रहा था ।गुस्सा भी आ रहा था शर्मा जी के उपर की खुद नज़ारे देख रहे है और मै नोकर की तरह बाइक चला रहा हु  कुछ  दूर आगे चलकर  बहुत सी कारे और बाइक  आ रही है  । बद्रीनाथ  की तरफ से वनवे  होने   के कारण पास करने में  बहुत  कम जगह होने के कारण पहाड़ की साइड में चिपककर  कार और बाइक वालो को जगह दी 20 min तक पहाड़ की दीवार से चिपके रहे हम चारो    आगे चले तो राईट साइड में  हेमकुंड साहेब  आया सरदारों का एक पवित्र  गुरुद्वारा है यहाँ   झुककर सलाम किया  और  कुछ दुकाने थी वहा जहा से हेमकुंड साहेब को पैदल रास्ता जाता है ।       हेमकुण्ड साहिब

हेमकुंट साहिब चमोली ज़िला, उत्तराखंड, भारत में स्थित सिखों का एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थान है। भारत के निरीक्षण मुताबिक यह हिमालय पर्वतों में 4632 मीटर (15,200 फुट) की ऊँचाई पर एक बर्फ़ीली झील किनारे सात पहाड़ों के बीच बिराजमान है; इन सात पहाड़ों पर निशान साहिब झूलते हैं। इस तक रिशीकेश-बद्रीनाथ साँस-रास्ता पर पड़ते गोबिन्दघाट से सिर्फ़ पैदल चढ़ाई के द्वारा ही पहुँचा जा सकता है।

यहाँ गुरुद्वारा श्री हेमकुंट साहिब सुशोबत है। इस स्थान का जैसे गुरु गोबिंद सिंघ द्वारा लिखे गए दसम ग्रंथ में आता है; इस करके यह उन लोगों के लिए ख़ास महत्व रखता है जोदसम ग्रंथमें विश्वास रखते हैं।  यहाँ  कुछ देर रुके और चल दिए  कीचड के कारण हालत ख़राब थी  मेरी बाइक जो हीरो हौंडा पेसन थी न्यू थी पर उसको देखकर कोई बता नही सकता था ।  की ये न्यू है । बहुत मज़ा आ रहा था आगे चलकर चढाई सुरु होने लगी थी । बीच में एक मंदिर  मिला  रूककर माथा टेका और  आगे चल दिए 11 बजने को को हो रहे थे । फिर महारानी मेरी बाइक ने झटके लेने शुरू कर दिए । एक तो चढ़ाई उपर से महारानी ने कह दिया की  नही चलुगी एक बार फिर प्लग बदला भला हो मेरे दिमाक का एक प्लग पुराना अपने साथ रख लिया था उसको बदला कुछ आराम मिला पर झटके बंद नही हुए  । शर्मा जी की अतुल जी के साथ उसके स्कूटर पर बेठा दिया अकेले ही बाइक चलाने लगा ।  अब पक्का यकीन हो चला था की प्रॉब्लम प्लग में नही काबोरेटर में है कचरा है उसमे इतना तो अपुन समझ ही सकता है।   मेकेनिक जो था इसका नही पर मारुती का तो हु ही कर भी लेता ठीक पर  ऒजार  नही थे    और टाइम भी नही था ।  आगे चले झटको की प्रॉब्लम  आती गई अकेले होने की वजह से कम प्रॉब्लम हो रही थी  तभी एक बड़ा सा गेट दिखाई दिया  उसपर शायद ठीक से याद नही पर लिखा था  । बद्रीनाथ में आप का स्वागत है । माना 4 km मीटर बद्रीनाथ 1 km  पहुच गए  ।  12 बज गए थे    बस स्टैंड पर बाइक लगाई  मंदिर देखना था । पर उससे पहले हालत ठीक करनी थी । और उससे भी पहले   जो चूहे पेट मे कूद रहे थे उसको भोजन करना  था वर्ना उस हालत ऐसी हो रही थी की कुछ देर और रुकते तो  वो चूहे को बिल्ली खाने वाली थी। होटल देखा  खाना खाया  4 आलू के पराठे खाए और वही होटल पर  बेग रखा और अपना एकमात्र रील वाला केमरा निकाल लिया । और चल दिए मंदिर के तरह एक  छोटा सा पुल पार किया । मंदिर के दर्शन किये  शर्मा जी ने एक फोटो ली अंदर उसको पता नही था की फोटो लेना मना है एक शोर सा हुआ और मंदिर के पुजारी ने केमरा को खीच कर अपने पास रख लिया और  कहने लगा की अब नही मिलेगा कोई खीच रहा है यहाँ फोटो । अब हमे क्या पता मिन्नतें का दॊर चला काफी देर तक मिन्नतें की जब जाकर  केमरा मिला ।  अब मंदिर से बाहर आकर  बाइक को  ठीक कराना था । दूकान तो मिल ही जाएगी पर मुसीबत तो हमारा साथ छोड़ने को कहा त्यार थी दुकान नही थी एक पिंचर वाले की दूकान थी उसने कहा की भाई स्पार्क प्लग है पुराना मेरे पास  100 रूपए में दुगा और अपने आप ही डालना होगा मरता क्या ना करता  अंधे को क्या चाहिए तो आखे ।  भागते भुत का लगोट  ही सही   100 रूपए में स्पार्क प्लग लिया  लगाया महारानी मेरी बाइक  ठीक हो गई पर झटके कम थे ।  अब जाना था इंडिया के आखरी गाँव  माना    वहा पीनी थी चाय। जी  हा वहा है । भारत की आखरी चाय की दूकान और चाय भी  25 रूपए की ।      अगले भाग में जारी

Sunday, 12 October 2014

चार धाम यात्रा

मोसम बहुत सुहाना था   हम चलते जा रहे थे साप की तरह बल खाती सड़क  थी      अतुल भाई अपने साथ  एक अलग से  एक एक्स्ट्रा  टायर लाये थे  रिम के साथ  शायद किसी दोस्त की माग कर   मै मन ही मन सोच रहा था की अगर मेरी बाइक मै पिंचर हो गया तो  क्या करेगे   रह रह कर ये चिंता सताए जा रही थी मेरे को  अगर पिंचर हो गया तो गए  उस टाइम  दिमाक  ने कहा की  जहा भी जाओ पूरी  तेयारी के साथ जाओ पर अब क्या हो सकता था  जो होना था जो करना था   हो चूका था   में मन ही मन अपने दिल को  दिलासा देता रहा  पर  अतुल भाई पर गुस्सा भी आ रहा था की मेने उनसे कहा था की हवा का एक पंप साथ ले लेना पर जल्दी मै  कुछ याद नही रहा !   खेर  जेसे होगा ठीक ही होगा  इतना सोच ही रहा था की  एक फट की आवाज आई मेने  सोचा लो भाई गया टायर    रुक  कर टायर देखा  वो सही सलामत था फिर मुंडी पीछे की तो पाया अतुल जी  का स्कूटर  रुका हुआ था  रजनी घनदा का पीप सड़क पर धूक कर  अपने दात दिखा कर खिसानी हँसी हँसते हए  बोले ओम भाई    पिंचर हो गया   उनको हँसता हुआ देख कर मुझे अंदाजा हो गया था की वो अपने आप से तो टायर बदलने से रहे  मेरे दिल पर बिजली सी गिर रही थी  गुस्सा भी आ रहा था पर अब शाम ढलने लगी थी तो मेने ही  ओज़ार लेकर लग गया टायर बदलने  शाम हो चली थी  पहाड़ो पर रात जल्दी ही हो जाती है  उजाला था पर टायर बदलते बदलते अँधेरा हो चला खेर किसी तरह यात्रा फिर सुरु हई 6 बजे हम जोशीमठ पहुच चुके थे भगवान का  शुक्रिया अदा किया और  ठीक से पहुच गए  पर हमे क्या पता था की मुसीबत की तो ये शुरुवात भर है । आगे अभी और मुसीबत हमारा इन्तजार कर रही थी । जोशीमठ पहुच कर   होटल लिया  मोसम ख़राब हो गया था हलकी हलकी बुदा बादी  शुरू हो गई  थी  ठण्ड  थी गर्म कपड़े थे हमारे पास  तो पहन लिए और कल के बारे मै  योजना बनाने लगे   कमरे मै बैठकर    की कल क्या करना है किसी से पूछा की बद्रीनाथ कितनी दूर है एक दूकान वाले ने बताया की70 km है यहाँ से    यही से एक रास्ता  ओली के लिए जाता है 13  या 15 km है ओली  जहा मेने सुना था की  बहुत बर्फ बारी  होती है वहा तो और जोशीमठ से ही रोपवे भी जाता है  ऐसा सुना सच है या झूठ पता नही  उसके बारे मै कल  सोचेगे  जाना है या नही  प्लान ये बना की कल  बद्रीनाथ  जायेगे वहा से माना  जो की 3 km है वहा जायेगे  माना इण्डिया का आखरी गाँव है  उसके बाद  से चीन की सीमा  शुरू हो जाती है  माना से वापस जोशीमठ और वहा से ओली जायेगे रात को वहा ही रुकेगे ।   पर कहते है न की जो मनुष्य सोचे अगर ऐसा हो जाये तो  उससे बड़ा कोई नही हो सकता है    पर   कल  मुसीबत हमारा बेशब्री से  हसीना की तरह इन्तजार कर रही थी न जाने कब से हमारी राह तक रही थी   मानो कह रही थी आ जाओ सनम कब से इन्तजार कर रही हु आप का   रात के 11 बजे अतुल भाई सो गए       अगली सुबह  4 बजे चलने के लिए।       ........    अगले भाग में जारी

बाइक से चार धाम यात्रा उतरा खंड

दोस्तों नमस्कार मै ओमत्यागी  आप को अपनी यात्रा के बारे मै बताना चाहता हु। आप ने बहुत से ब्लॉग देखे होगे। बहुत  अच्छा  लगा की   लोग कितने कम कम पैसे मै इतनी दूर दूर घूम कर आ जाते है  ।उनका जवाब नहीं है ।उनको मेरा एक सलाम  मेने भी सोचा की हम भी घूमते रहते है। क्यों  ना अपनी यात्रा को आमजन तक पहुचाया जाए । कुच समझ नहीं आ रहा की कहा से  शुरू  करू  ।बहुत पहले यात्रा की हुई   थी ।याद भी नही उनकेबारे में    फोटो ही है  ।जब तो रील वाले  ही  केमरे  थे   ।     फोटो तो साफ़ नहीं है। पर काम चल  जायेगा इनसे भी ।तो भाइयो  जेसे जेसे यात्रा की बाते याद आती जाएगी आप को बताता रहूगा ।शुरुवात करता  हु  ।उतराखंड चार धाम यात्रा     से।      उत्तराखण्ड पर एक  नज़र  डाल  ही  लेते  है ।उत्तराखंड का जन्म 9 नवंबर सन 2000 को भारत के सत्ताईसवें राज्य के रूप में उत्तरांचल (अब उत्तराखंड) नाम से हुआ।इससे पहले यह उत्तर प्रदेश का ही एक भाग था। उत्तराखंड 2 मंडलो गढ़वाल और कुमाऊँ में विभक्त है. उत्तराखंड में वर्तमान में 13 जिले हैं जिनमें से 7 गढ़वाल में – देहरादून , उत्तरकाशी , पौड़ी , टेहरी (अब नई टेहरी) , चमोली , रूद्रप्रयाग, हरिद्वार और 6 कुमाऊँ में-अल्मोड़ा, नैनीताल, पिथौरागढ़, चम्पावत, बागेश्‍वर और उधम सिंह नगर हैं। यह उत्तर में चीन , हिमाचल प्रदेश , पूर्व में नेपाल , दक्षिण में उत्तर प्रदेश और पश्चि‍म में हरियाणा व हिमाचल प्रदेश से घिरा हुआ है। इसकी लंबाई पूर्व से पश्चिम की ओर 358 किमी और चौड़ाई उत्तर से दक्षिण की ओर 320 किमी है। यहां 70 विधानसभा सीट , 3 राज्य सभा सीट और 5 लोकसभा सीट हैं। इस आयताकार आक़ृति के राज्य का अस्थायी राजधानी देहरादून है जिसे गैरसैण ले जाने के लिये जनता प्रयत्नशील है।उत्तराखंड का उच्च न्यायालय नैनीताल में है। उत्तराखंड का क्षेत्रफल 53483 वर्ग कि. मी. है और यहां 85 लाख (2001 की जनगणना के अनुसार) जनसंख्या निवास करती है ।उत्तराखण्ड (पूर्व नाम उत्तराञ्चल) , उत्तर भारत में स्थित एक राज्य है जिसका निर्माण 9 नवम्बर 2000 को कई वर्षों के आन्दोलन के पश्चात भारत गणराज्य के सत्ताइसवें राज्य के रूप में किया गया था . सन 2000 2006 से तक यह उत्तराञ्चल के नाम से जाना जाता था. जनवरी 2007 में स्थानीय लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए राज्य का आधिकारिक नाम बदलकर उत्तराखण्ड कर दिया गया. राज्य की सीमाएँ उत्तर में तिब्बत और पूर्व में नेपाल से लगी हैं. पश्चिम में हिमाचल प्रदेश और दक्षिण में उत्तर प्रदेश इसकी सीमा से लगे राज्य हैं. सन 2000 में अपने गठन से पूर्व यह उत्तर प्रदेश का एक भाग था. पारम्परिक हिन्दू ग्रन्थों और प्राचीन साहित्य में इस क्षेत्र का उल्लेख उत्तराखण्ड के रूप में किया गया है. हिन्दी और संस्कृत में उत्तराखण्ड का अर्थ उत्तरी क्षेत्र या भाग होता है. राज्य में हिन्दू धर्म की पवित्रतम और भारत की सबसे बड़ी नदियों गंगा और यमुना के उद्गम स्थल क्रमशः गंगोत्री और यमुनोत्री तथा इनके तटों पर बसे वैदिक संस्कृति के कई महत्त्वपूर्ण तीर्थस्थान हैं.।देहरादून, उत्तराखण्ड की अन्तरिम राजधानी होने के साथ इस राज्य का सबसे बड़ा नगर है. गैरसैण नामक एक छोटे से कस्बे को इसकी भौगोलिक स्थिति को देखते हुए भविष्य की राजधानी के रूप में प्रस्तावित किया गया है किन्तु विवादों और संसाधनों के अभाव के चलते अभी भी देहरादून अस्थाई राजधानी बना हुआ है. राज्य का उच्च न्यायालय नैनीताल में है.।राज्य सरकार ने हाल ही में हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये कुछ पहल की हैं. साथ ही बढ़ते पर्यटन व्यापार तथा उच्च तकनीकी वाले उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए आकर्षक कर योजनायें प्रस्तुत की हैं. राज्य में कुछ विवादास्पद किन्तु वृहत बाँध परियोजनाएँ भी हैं जिनकी पूरे देश में कई बार आलोचनाएँ भी की जाती रही हैं, जिनमें विशेष है भागीरथी - भीलांगना नदियों पर बनने वाली टिहरी बाँध परियोजना. इस परियोजना की कल्पना 1953 मे की गई थी और यह अन्ततः 2007 में बनकर तैयार हुआ. उत्तराखण्ड, चिपको आन्दोलन के जन्मस्थान के नाम से भी जाना जाता है. ये हुई  बात उत्तराख ड  की     अब  बात करते है  यात्रा की मेरा यात्रा का कोई  प्लान नही था।   जॉब करता था।मै मारुती मै जो अब भी करता हु ।

मेरी जॉब के पास एक वेंकट होल था। उसके मालिक थे mr अतुल सहानी ।मै अक्सर उसके पास जा कर बेठ जाया करता था ।तो उन्होंने कहा की भाई बाइक से घुमने चलना है। तो मेने कहा की ठीक है ।घर से इजाजत नहीं मिली पर अतुल जी से वादा कर लिया था ।तो बाइक ली उन्होंने अपना स्कूटर लिया। उनका एक काम करने वाला भी साथ हो गया ।एक मेरा दोस्त है मेने उसको  भी ले लिया अपने साथ । और निकल  लिए हम।वो  बात है न की जब बड़ो का आशीर्वाद नही होता तो कुछ भी सही नही होता है ।हुआ भी ऐसा ही जो मेरा दोस्त है जिसको मै साथ ले गया था उसको मै प्यार से  कल्लु कहता हु उसने चलते हु बाइक चलाने कीजिद की ।तो मेने उसको दे दी थोरी दूर चलते ही उसने एक   बाइक वाले की बाइक मै टक्कर दे मारी ।मेने शोचा लो भाई हो गई यात्रा ।बाइक वाले भाई को कोई चोट नही लगी थी ।पर उनकी लाइट टूट गई। फेसला करा पैसे दिए ।अगर यात्रा पर नही जा रहा होता तो गलती उसकी भी थी ।और नुकशान हमारी बाइक मै भी हुआ था। हेंडिल     मुड गया आगे की लाइट टूट गई थी ।और चोट अलग से लग गई ।अब सब का मूड ख़राब हो गया था ।यात्रा के पहले दिन ही अशुभ हो गया।  खेर बाइक ठीक कराइ  इस काम मै २बज गए। मेरठ मै ही हमने सोचा था की नरेंदर नगर तक आज पहुच जायेगे इसलिए सुबह ९ बजे निकले थे ।तो असा नही हुआ हम रात 9 बजे हरिद्वार पहुचे  हम रुकने के लिए होटल देख रहे थे तो मेरे दोस्त अजय का जो मेरे साथ काम करता था उसका फ़ोन आया की कहा पहुचे मेने कहा की सब प्लान उल्टा हो गया  उसको सारी  बात बताई तो उसने कहा की आप मेरे जीजा जी के यहाँ रुक जाओ वो ऋषि केश  मै रहते है मेने मना किया पर वो नही माना उसने अपने जीजा जी को फ़ोन दिया वो मुनिकीरेती के नाम से जो जगह है वह मिल गए मिलना हुआ खाना खाया बात हुई १२ बज गए गर्मी का टाइम था जून थी शायद कह नही सकता बहुत दिन की बात है याद कर रहा हु तो सुबह ६ बजे उनसे विदा ली और चल दिए मजिल की तरह मंजिल थी  बद्रीनाथ     ऋषि केस   कुछ दूर तक चले तो  मेरा पहला अनुभव था हिल पर बाइक से यात्रा   ऐसा लग रहा था की  कोई पीचे से बाइक को खीचरहा हो  जगल का रास्ता सुरु हो गया था    उस टाइम उतराखंड में भूकंप आया था जगल के पेड़ अपनी जगह से टूट गए थे वेसे भी उतराखंड  के पहाड़ पक्के पहाड़ नही है हम चलते गए मोसम बहुत सुहाना था बाइक चलामे मै मज़ा आ रहा था यात्रा का ये दूसरा दिन था


ये श्री नगर से पहले की फोटो है ये सबसे पहले कल्लु फिर अतुल भाई फिर उनका दोस्त   ये मेने फोटो  लिया है  
अगले भाग मै जारी 

Wednesday, 24 September 2014

न्यू मारुती ciaz

 नमस्कार दोस्तों आज मै आप के लिए मारुती के ciaz के ऐबारे मै कुछ जानकारी है ऐसालगता है कि मारुति सुजुकी इस बार बड़ा धमाल करने वाली है। कंपनी मिड-साइज सेडान सेगमेंट में अपनी तीसरी कार के तौर पर मारुति सियाज को लॉन्‍च करने वाली है।

कंपनी इससे पहले मारुति बलेनो और मारुति एसएक्स4 को इस सेगमेंट में उतार चुकी है। इन कारों ने कुछ खास अच्छा प्रदर्शन ही किया। लेकिन मारुति सियाज इन कारों से बेहतर कर सकती है।

महज तीन दिन में मारुति सियाज ने 3,000 कारों की बुकिंग की है। ये कंपनी के लिए अच्छा संकेत हो सकता है, लेकिन मारुति की पिछली मिड साइज कार को कोशिश को देखकर ये कहना जल्दबाजी होगी कि मारुति सियाज कामयाबी की राह पर है।मिड-साइज सेगमेंट में मारुति सियाज का सीधा मुकाबला होंडा सिटी और हुंडई वेरना से है। मिड साइज सेगमेंट में होंडा सिटी की सबसे अच्छी पकड़ है।

होंडा प्रति माह करीब 7,000 ‌होंडा सिटी की बिक्री करती है जबकि हुंडई वेरना एक महीने में करीब 3,000 बिकती हैं। सियाज की सबसे बड़ी सफलता का राज है सबसे ज्यादा माइलेज कार।

कंपनी का दावा है कि मारुति सुजुकी कार 26.3 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देगी। होंडा की सिटी एक लीटर में 26 किमी का माइलेज देने का दावा करती है।   साभार अमर उजाला  न्यूज़ पेपर

कार की चोरी केसे होती है




मॉस्को में हर दिन कार चोरी की 40 घटनाएँ होती हैं

कारों की चोरी के किस्से तो आम हैं मगर कार चोर किन चीज़ों का और कैसे इस्तेमाल करते हैं इसकी जानकारी नही मिल पाती.

मारुती के न्यू कार celerio फ़ीचर्स

नमश्कार दोस्तों आज आप के लिए मै मारुती की न्यू कारcelerio  के बारे मै बात करुगा मारुती ने बहुत बढ़िया कार बनाई है इसके फीचर को मेने खुद देखा है  
अगर आपको गियर शिफ्टिंग में ही आनंद आता है तो उसका भी इंतजाम इसमें किया गया है। कंपनी के अनुसार इसका एआरएआई माइलेज 23.1 किमी प्रति लीटर है, जो कि इसके मैनुअल गियर वाले वैरियंट के बराबर है। सिटी में चलाने के लिए ऑटोमैटिक मोड का ऑप्शन बेस्ट रहता है।

बस ड्राइव मोड पर गियर शिफ्ट करें और एक उत्साही ड्राइव का लुत्फ� उठा सकते हैं। मेरी चंडीगढ़ से दिल्ली की ड्राइव में मैंने इसे 160 किमी तक पहुंचाया लेकिन यह गाड़ी 100 से 110 किमी प्रति घंटा के बीच में ही सबसे अधिक आराम महसूस कराती ह

गीली सड़क पर जब टायर सड़क को उतने अच्छे से नहीं पकड़ पाते, तब एबीएस रामबाण साबित होता है। अन्य फीचर में ब्लूटूथ ऑडियो सिस्टम, स्टीयरिंग पर ऑडियो और फोन कंट्रोल, इलेक्ट्रिक रियर व्यू मिरर्स, पावर विंडो, की लेस एंट्री, टिल्ट स्टीयरिंग आदि शामिल हैं।

हालांकि ये सब भी टॉप मॉडल में ही हैं। एसी विद हीटर, पावर स्टियरिंग और मल्टी फंक्शन डिसप्ले जैसे फीचर्स बेस वैरियंट में भी दिए हैं।

ोकप्रिय के-10 इंजन के नए अवतार 1.0 लीटर के-नेक्स्ट इंजन का प्रयोग किया है। यह 68 बीएचपी की शक्ति और 90 एनएम का टॉर्क� उत्पन्न करती है जो कि एक कांपैक्ट कार के लिहाज से संतोषजनक है। इसका ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन पारंपरिक ट्रांसमिशन से अलग है।

सुरक्षा फीचरों की बात करें तो इसमें सेलेरियो में एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (एबीएस), एयरबैग्स, फ्रंट फॉग लैंप्स और रियर विंडो वाइपर को जगह दी है। लेकिन यह सब कुछ सिर्फ� टॉप वैरिएंट में मिलेंगे। जीरकपुर में हो रही भारी बारिश से गुजरते हुए मैंने इसके एबीएस को परखा।